"प्यार”
पाया तुमको मिला नया संसार है
इसमें ख़ुशियाँ मिली बेशुमार है
जीना है- जीना है -जीना है
कानों में गूंजती बस ये आवाज़ है
तुम दूर हो मगर मिलोगे कभी
तुम ना भूलोगे मुझको ये विश्वास है
दिल भी डरता नहीं अब किसी बात से
गुजरता नहीं अब ग़म इस राह से
बदले हुए कुछ ऐसे अब मेरे हालात है
मुझे जीना है अब खुलकर हर दिन को हंसकर
जीवन के ये पल ही तो कुछ ख़ास है
है किसका असर ना मालूम मुझे
तुम ही आकर कहो कि क्या यही प्यार है।
Thursday, August 27, 2020
Tuesday, August 18, 2020
मैं और सूरज
मुझमें और सूरज में फर्क हीं क्या हैं
वो जैसे हजारो किरणों के साथ आता हैं ,
मैं भी सुबह हजारों उम्मीदों के साथ जागती हूँ
उसकी किरणें फ़ैल जाती है
उजाला बनके हर तरफ
मैं भी रोशनी ख़ुशीे की भरने
बिखर जाती हूँ कोने-कोने में
थक के चूर हो जाती है किरणें शाम होने तक
उसका चेहरा भी उतर जाता है मेरी तरह
वो भी फिर मेरी तरह डूब जाता है
नींद में रात भर के लिए ,
लेकिन ..
अगली सुबह फिर वो जागता है और चल पड़ता है
नयी उम्मीदों की किरणों को साथ लिए
कुछ मेरी ही तरह .....
वो जैसे हजारो किरणों के साथ आता हैं ,
मैं भी सुबह हजारों उम्मीदों के साथ जागती हूँ
उसकी किरणें फ़ैल जाती है
उजाला बनके हर तरफ
मैं भी रोशनी ख़ुशीे की भरने
बिखर जाती हूँ कोने-कोने में
थक के चूर हो जाती है किरणें शाम होने तक
उसका चेहरा भी उतर जाता है मेरी तरह
वो भी फिर मेरी तरह डूब जाता है
नींद में रात भर के लिए ,
लेकिन ..
अगली सुबह फिर वो जागता है और चल पड़ता है
नयी उम्मीदों की किरणों को साथ लिए
कुछ मेरी ही तरह .....
Wednesday, August 12, 2020
...तारीख
उन आँखों से इन आँखों तक ,
सपनो की कतार लगा दी ,
हमने दिल के हर कोने में
तस्वीर -ऐ -बहार लगा दी
सपनो की कतार लगा दी ,
हमने दिल के हर कोने में
तस्वीर -ऐ -बहार लगा दी
कभी ख़त्म ना होने देंगे
कभी कम ना होने देंगे
आते रहेंगे नये-नये सपने
हमने दस्तक हज़ार लगा दी
हरा रहेगा मन मधुबन-सा
कभी पतझड़ ना आने देंगे
हरदम नाचे मन मयूरी-सा
सावन की फुहार लगा दी
जगमगाते रहेंगे दीप ख़ुशी के
रंग -रंगीला रहे जीवन अब
ना आयेगी कभी रोने की नौबत
हर तारीख त्यौहार बना दी।
कभी कम ना होने देंगे
आते रहेंगे नये-नये सपने
हमने दस्तक हज़ार लगा दी
हरा रहेगा मन मधुबन-सा
कभी पतझड़ ना आने देंगे
हरदम नाचे मन मयूरी-सा
सावन की फुहार लगा दी
जगमगाते रहेंगे दीप ख़ुशी के
रंग -रंगीला रहे जीवन अब
ना आयेगी कभी रोने की नौबत
हर तारीख त्यौहार बना दी।
Tuesday, August 11, 2020
... रफ्तार बढ़ा
जो बीत गयी सो बात गयी ...ये बात किसी ने खूब कहीं
फिर क्या सोचे तू ,पड़ा-पड़ा ..उठ जाग जा अब रात गयी
कर तैयारी आगे की बीती बातों को को छोड़ परे ,वरना
फिर तू ही बोलेगा यार मेरे .. सारी मेहनत बेकार गयी।
मन बाँध ले कुछ बनने की , अब तू ठान ले कुछ करने की
देख सूरज की किरणें कैसे आकर तेरी राहों में फ़ैल गयी।
न बना बहाना अब कोई,नहीं वक्त बचा करे तू मनमानी
फिर न पछताना ये कहकर कि अब तो उमर ही बीत गयी।
चल कदम बड़ा और चलता जा ,ठोकर को ठोकर से मार भगा
अपने इन कदमो में तू फिर ला दुनिया को फिर झुका।
चल निकाल तीर अपने तरकश से अपने लक्ष्य पर साद ज़रा
देख अचंभित हो सब देव-गुरु तू ऐसे अपने तीर चला।
मत देर लगा तू ऐसी दौड़ लगा अपने कदमों की धार बढ़ा
सबको पीछे तू छोड़ ज़रा, अरे यार मेरे रफ़्तार बड़ा
सारी दुनिया को दिखला दे की तुझमें अभी है बात वही।
...दीपक
नहीं चाँद आया तो
क्या बात हैं
आज सितारों को रोशन
करेंगे दीये .
ये रात काली कैसे
रहेगी भला
हर कोने में जब हैं
दीपक जला.
हैं दीवाली का कहना
हमसे यहीं
हो अँधेरा कहीं रखो दो
दीपक वहीं .
चाँद आये न आये तुम
ग़म न करो
एक दीपआस का बस
जलाए रखो .
होंगे तारे भी खुश कि
अब क्या गिले
एक चाँद के बदले हज़ारों
दीपक मिले .
at
Sunday, August 9, 2020
....सीढ़ी
कल रात ऐसे ही छत पर खड़ी थी
खड़ी आसमां को यू ही तक रही थी
देखा कि तारों से भरे आसमं में भी
वो चाँद बिलकुल तनहा खड़ा था ।
उतर आये वो मेरी छोटी सी छत पर
उसके लिए मैंने एक सीढ़ी लगा दी
आया तो पूछा हो क्यूँ इतने परेशान
वो बोला ,
नहीं भाती मुझको ये सितारों की महफ़िल
नहीं मन लगता अब कही भी तेरे बिन
या तू साथ चल मेरे, मेरे जहाँ में
या कर ले तू शामिल मुझे अपने जहाँ में।
मन तो हुआ उसको अपना बना लूँ
कही लौट ना जाए,मैं वो सीड़ी छिपा दूँ
वो बोला,
कहने को तो मेरे पास सारा जहाँ है
मगर तेरी बाहें ही अब मेरा आसमाँ है
बेसुध हुई मैं उसकी बातों में खोयी
पर जब नींद टूटी मैं फूट-फूट कर रोयी
कोई भी नहीं था वहाँ,मैं फ़र्श पर पड़ी थी
पर जो लगायी थी बड़ी हसरतों से छत पर,
मेरे सपनो की वो सीड़ी,अब भी पड़ी थी।।"
खड़ी आसमां को यू ही तक रही थी
देखा कि तारों से भरे आसमं में भी
वो चाँद बिलकुल तनहा खड़ा था ।
उतर आये वो मेरी छोटी सी छत पर
उसके लिए मैंने एक सीढ़ी लगा दी
आया तो पूछा हो क्यूँ इतने परेशान
वो बोला ,
नहीं भाती मुझको ये सितारों की महफ़िल
नहीं मन लगता अब कही भी तेरे बिन
या तू साथ चल मेरे, मेरे जहाँ में
या कर ले तू शामिल मुझे अपने जहाँ में।
मन तो हुआ उसको अपना बना लूँ
कही लौट ना जाए,मैं वो सीड़ी छिपा दूँ
वो बोला,
कहने को तो मेरे पास सारा जहाँ है
मगर तेरी बाहें ही अब मेरा आसमाँ है
बेसुध हुई मैं उसकी बातों में खोयी
पर जब नींद टूटी मैं फूट-फूट कर रोयी
कोई भी नहीं था वहाँ,मैं फ़र्श पर पड़ी थी
पर जो लगायी थी बड़ी हसरतों से छत पर,
मेरे सपनो की वो सीड़ी,अब भी पड़ी थी।।"
कोई.....
कोई इस कदर मुझको
यूँ आँखों से चाहे
दिल में उतरकर वो मेरी
रूह को छू जाए।
वो जब भी मुझे देख
यूँ मंद-मंद मुसकाए,
बिन-बोले बिन-सुने ही वो
मेरा हमराज़ बन जाए।
वो आए ना पास मेरे ना
कभी अंग लगाए,
बिन छूहे ही वो मन
मेरा यूँ सावन कर जाए।
आँखों में मेरी वो ऐसे
रच-बस जाए
जहाँ भी मैं देखूँ छवि
उसकी ही नज़र आए ।
काश! हो जाए कुछ ऐसा
दिल दिल से मिल जाए
बिन थामे ही हाथ मेरा
वो हमसफ़र बन जाए।
यूँ आँखों से चाहे
दिल में उतरकर वो मेरी
रूह को छू जाए।
वो जब भी मुझे देख
यूँ मंद-मंद मुसकाए,
बिन-बोले बिन-सुने ही वो
मेरा हमराज़ बन जाए।
वो आए ना पास मेरे ना
कभी अंग लगाए,
बिन छूहे ही वो मन
मेरा यूँ सावन कर जाए।
आँखों में मेरी वो ऐसे
रच-बस जाए
जहाँ भी मैं देखूँ छवि
उसकी ही नज़र आए ।
काश! हो जाए कुछ ऐसा
दिल दिल से मिल जाए
बिन थामे ही हाथ मेरा
वो हमसफ़र बन जाए।
पसंद
इतने सितारों में, लाखों हज़ारों में
तुम्हें एक तारा ये जाने क्यूँ भा गया,
सारे हसीन थे मुझ से रंगीन थे
मुझमें ही ऐसा क्या पसंद आ गया,
तुम चाँद थे वहाँ थोड़ी-सी देर के
बेठे थे सब वहाँ तुमको ही घेर के,
हम दूर से खड़े, ये सोचते रहे
नज़र कहीं से ये हम पे आ पड़े,
फिर हो गया वहीं जिसकी थी चाह हमें
वो छोड़कर सभी को मेरे पास आ गया,
ना छुआ मुझे ज़रा,कुछ कहा भी नहीं
बस आँखों-आँखों में प्यार हो गया।
तुम्हें एक तारा ये जाने क्यूँ भा गया,
सारे हसीन थे मुझ से रंगीन थे
मुझमें ही ऐसा क्या पसंद आ गया,
तुम चाँद थे वहाँ थोड़ी-सी देर के
बेठे थे सब वहाँ तुमको ही घेर के,
हम दूर से खड़े, ये सोचते रहे
नज़र कहीं से ये हम पे आ पड़े,
फिर हो गया वहीं जिसकी थी चाह हमें
वो छोड़कर सभी को मेरे पास आ गया,
ना छुआ मुझे ज़रा,कुछ कहा भी नहीं
बस आँखों-आँखों में प्यार हो गया।
......कभी
यूँ दूर से ना चाँदनी बरसाया करो
ए-चाँद मेरे घर भी, कभी आया करो,
अपने ऊँचे बने उस महल से,भी कभी
इस जमीं पर भी कभी उतर आया करो,
दूर- दूर से खड़े-खड़े यूँ देखना भी क्या
पास आकर नज़र भी तो मिलाया करो,
यूँ सितारों में रहकर दिल जलाना भी क्या
कभी हमें देखकर भी तुम मुस्कुराया करो,
इंतज़ार रात का भी यूँ करना भी क्या
दिन में भी कभी तुम निकल आया करो।
ए-चाँद मेरे घर भी, कभी आया करो,
अपने ऊँचे बने उस महल से,भी कभी
इस जमीं पर भी कभी उतर आया करो,
दूर- दूर से खड़े-खड़े यूँ देखना भी क्या
पास आकर नज़र भी तो मिलाया करो,
यूँ सितारों में रहकर दिल जलाना भी क्या
कभी हमें देखकर भी तुम मुस्कुराया करो,
इंतज़ार रात का भी यूँ करना भी क्या
दिन में भी कभी तुम निकल आया करो।
ऎ-चाँद
दूर बहुत थे मुझसे लेकिन
बादलों से निकलकर जब तुम चुपके से
मेरी खिड़की पर आ जाते थे ....
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत थे ।
घटता-बढ़ता-सा प्यार तुम्हारा
कम-ज़्यादा ना देखा मैंने, बस
मुझे देख जब तुम मुसकाते थे...
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे ।
कभी-कभी छुप जाना तुम्हारा
और ग़हन अंधेरों में खो जाना
जाने क्यूँ इतना सताते थे..
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे ।
बेशुमार तारे थे अपने दरमियाँ
सबसे नज़र बचाकर फिर भी जब तुम
मेरे पास खिंचे चले आते थे ....
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे।
बादलों से निकलकर जब तुम चुपके से
मेरी खिड़की पर आ जाते थे ....
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत थे ।
घटता-बढ़ता-सा प्यार तुम्हारा
कम-ज़्यादा ना देखा मैंने, बस
मुझे देख जब तुम मुसकाते थे...
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे ।
कभी-कभी छुप जाना तुम्हारा
और ग़हन अंधेरों में खो जाना
जाने क्यूँ इतना सताते थे..
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे ।
बेशुमार तारे थे अपने दरमियाँ
सबसे नज़र बचाकर फिर भी जब तुम
मेरे पास खिंचे चले आते थे ....
ऎ-चाँद मुझे तुम बहुत भाते थे।
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"प्यार” पाया तुमको मिला नया संसार है इसमें ख़ुशियाँ मिली बेशुमार है जीना है- जीना है -जीना है कानों में गूंजती बस ये आवाज़ ...